योजना शुरू हुए एक साल से अधिक का समय बीता, फिर भी कागजी प्रक्रियाओं में उलझे आवेदन; लाभार्थियों में बढ़ी भारी निराशा
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के क्रियान्वयन में हो रही देरी के कारण हजारों गरीब परिवारों का अपना घर होने का सपना फिलहाल टूटता नजर आ रहा है। सितंबर 2024 में अगले पांच वर्षों के लिए शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी योजना को एक साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन जमीनी स्तर पर अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं। कड़ाके की ठंड के इस मौसम में लाभार्थियों को उम्मीद थी कि उन्हें अपनी पक्की छत मिल जाएगी, लेकिन फिलहाल वे खुले आसमान या कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं। योजना की कछुआ गति ने आम जनमानस की चिंताओं को बढ़ा दिया है।
कागजी प्रक्रियाओं और सत्यापन में फंसी योजना
प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के तहत लाभार्थियों को घर बनाने के लिए ₹2.5 लाख तक की वित्तीय सहायता और होम लोन के ब्याज पर ₹1.80 लाख तक की सब्सिडी देने का प्रावधान है। हालांकि, योजना के शुभारंभ के एक साल बाद भी प्रशासन केवल आवेदनों के सत्यापन और कागजी कार्यवाही में ही उलझा हुआ है। ऑनलाइन प्राप्त आवेदनों की जांच और भौतिक सत्यापन (Physical Verification) की प्रक्रिया अभी भी जारी है, जिसके कारण पात्र लोगों को किस्तों का भुगतान शुरू नहीं हो सका है। लाभार्थियों का कहना है कि उन्होंने बड़ी उम्मीद के साथ आवेदन किया था, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
धनराशि जारी होने की कोई निश्चित समय सीमा नहीं
आवास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर आवेदनों की जांच का काम तेजी से किया जा रहा है, लेकिन लाभार्थियों के खातों में धनराशि भेजने का निर्णय उच्च स्तर (शासन स्तर) से लिया जाना है। सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि प्रशासन की ओर से अभी तक कोई निश्चित समय सीमा (Deadline) निर्धारित नहीं की गई है कि पहली किस्त कब जारी की जाएगी। धनराशि कब आएगी, इसके बारे में स्पष्ट जानकारी न होने से उन लोगों की परेशानी बढ़ गई है जिन्होंने घर बनाने के लिए पुराने ढांचे गिरा दिए हैं या उधारी पर काम शुरू करने की सोच रहे थे।
भीषण सर्दी में बढ़ी लाभार्थियों की मुसीबतें
वर्तमान में उत्तर भारत समेत कई इलाकों में भीषण ठंड पड़ रही है। योजना के लाभार्थियों ने भरोसा जताया था कि सर्दी की ठिठुरन भरी रातों से पहले उन्हें अपना पक्का आवास मिल जाएगा, जिससे उन्हें और उनके परिवार को राहत मिलेगी। लेकिन योजना के अधर में लटकने से उन्हें एक बार फिर मजबूरी में सर्दियों का सामना करना पड़ रहा है। लाभार्थियों का आरोप है कि सरकारी सिस्टम की जटिलताओं की वजह से योजना का लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा है, जो सीधे तौर पर गरीब वर्ग के हितों को प्रभावित कर रहा है।
प्रशासन का पक्ष और भविष्य की अनिश्चितता
मामले पर प्रशासन का कहना है कि वे पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी स्तरों पर आवेदनों की गहन जांच कर रहे हैं ताकि कोई भी अपात्र व्यक्ति योजना का लाभ न उठा सके। प्रशासन के अनुसार, सत्यापन प्रक्रिया पूरी होते ही पात्र लोगों की सूची शासन को भेज दी जाएगी। हालांकि, लाभार्थियों के मन में सवाल अभी भी बरकरार है कि आखिरकार यह योजना पूरी तरह से कब लागू होगी और उनके खुद के घर का सपना कब साकार होगा। फिलहाल, योजना की अनिश्चितता ने लोगों को काफी मानसिक और शारीरिक परेशानी में डाल दिया है।