पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से बढ़ेगा तापमान; शीतलहर और पाले से मिलेगी राहत
आज 14 जनवरी 2026 को उत्तर भारत में मौसम साफ बना हुआ है, लेकिन आने वाले दिनों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने वाला है। स्कायमेट वेदर के विशेषज्ञ महेश पलावत के अनुसार, 16 जनवरी से एक नया और शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) उत्तर भारत में दस्तक देगा। इस सिस्टम के कारण हवाओं की दिशा उत्तर-पश्चिम से बदलकर दक्षिण-पश्चिम हो जाएगी। इससे न्यूनतम तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होगी और पिछले कई दिनों से पड़ रहे भीषण ‘पाले’ (Frost) से किसानों और आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी।
पहाड़ों पर भारी हिमपात और दो समुद्री हवाओं का मिलन
19 जनवरी से मौसम की गतिविधियों में और तेजी आएगी। एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र (Cyclonic Circulation) पाकिस्तान और उसके आसपास बनेगा, जिससे अरब सागर और बंगाल की खाड़ी, दोनों ओर से नमी वाली हवाएं उत्तर भारत पहुंचेंगी। इसके प्रभाव से पहाड़ों पर बर्फबारी उग्र हो जाएगी। सबसे अच्छी खबर यह है कि इस बार उत्तराखंड, कुल्लू-मनाली और शिमला जैसे इलाकों में भी अच्छी बर्फबारी होने की संभावना है, जो अब तक सूखे पड़े थे। माता वैष्णो देवी के दरबार और नैनीताल के ऊंचे पहाड़ों पर भी 20-22 जनवरी के बीच बर्फबारी के आसार हैं।
मैदानी राज्यों में बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट
20 से 23 जनवरी के बीच पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान और उत्तरी मध्य प्रदेश में अच्छी बारिश होने की संभावना है। अमृतसर, लुधियाना, पटियाला से लेकर दिल्ली-एनसीआर तक बादल बरसेंगे। कुछ इलाकों में ओले (Hailstorm) गिरने की भी आशंका है, जो रबी की फसलों के लिए कुछ हद तक चिंता का विषय हो सकता है, लेकिन सामान्य तौर पर यह बारिश फसलों के लिए फायदेमंद साबित होगी। उत्तर प्रदेश के मेरठ, बरेली और लखनऊ तक इस बारिश का असर 22-23 जनवरी को देखा जा सकता है।
मध्य और दक्षिण भारत का हाल
राजस्थान में 21-22 जनवरी को गंगानगर, जयपुर और अलवर समेत कई जिलों में बारिश की गतिविधियां होंगी। मध्य प्रदेश के ग्वालियर संभाग में 22 जनवरी के आसपास बारिश की संभावना है, जबकि बाकी हिस्सों में कड़ाके की सर्दी अगले दो-तीन दिनों तक बनी रहेगी। गुजरात और महाराष्ट्र में भी हवाओं की दिशा बदलने से सर्दी में कमी आएगी। दक्षिण भारत में केरल और तमिलनाडु के कुछ दक्षिणी हिस्सों को छोड़कर बाकी राज्यों जैसे आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में मौसम मुख्य रूप से शुष्क बना रहेगा।
पर्यटकों और किसानों के लिए महत्वपूर्ण संकेत
जो पर्यटक बर्फबारी का इंतजार कर रहे हैं, उनके लिए 19-20 जनवरी के बाद पहाड़ों का रुख करना फायदेमंद हो सकता है। वहीं, मैदानी इलाकों के किसानों को सलाह दी गई है कि वे पाले से तो बच जाएंगे, लेकिन आने वाली बारिश और ओलावृष्टि को ध्यान में रखते हुए अपनी फसलों का प्रबंधन करें। 16 जनवरी से बढ़ने वाला न्यूनतम तापमान रात की ठिठुरन को कम करेगा, जिससे सर्दी का अहसास कुछ कम होने लगेगा।